का से कहूं ....
बंधुओ और भगिनिओं ,मेरे मन में अनेक झंझावात उठ रहे हैं , मैं ने ये सब झंझावात कुछ अख्बरात को भिजवाई लेकिन मुझको मंच नही मिल पाया कदाचित उन के वाद से मेरे वाद का संवाद नही हो पाया होगा,,
अंतत मैं अपने मित्रो से रूबरू होने यहाँ चला आया.
मित्रो शिक्षा से सब का सरोकार है . हर एक अपने बच्चे को शिक्षित करना चाहता है.
परोपकारी दानवीरों के दान से अनेकानेक स्कूल कालेज दान और अनुदान में मिली जमीन पर निर्मित हैं .
उन सुधि दानवीरों को कदाचित ये भान भी नही होगा कि कभी ऐसी अवस्था भी होगी कि शिक्षा जैसी परोपकारी साधना ,व्यापारियो के लिए साध मात्र बन जाये गी .
विलायत से खबरें आ रही हैं वहा के संस्थानों में अमरबेल छा चली है . अब ये अमरबेल वहा के स्कूलों कि अचल सम्पत्ति का दोहन करें गी .
कार्य काल के अतिरिक्त समय वहां की अचल सम्पत्ति को ये अम्बर बेल यत्र तत्र सर्वत्र दोहन करे अथवा शोषण ये उस की मर्जी .
ये ढकी छिपी बू यहाँ भी यही करे गी.
परोपकारी दानवीरों के दान से अनेकानेक स्कूल कालेज दान और अनुदान में मिली जमीन पर निर्मित शिक्ष्ण संस्थानों को कोई सरकारू बिचोलिया अपने कमिशन के एवज कब बेच खाए गा ...
इसकी भनक भी न पड़े गी ... समय है, शिक्षा सम्बद्ध कानून मात्र बनाने से कुछ नही होगा .मात्र नीति निर्माण से नीयत और नियति नही बदले गी .
उतिष्ठ ,प्रतिष्ठित. जागृत,

{ਸਿਰਜਣਾ ਦੇ ਪਲ ਮਿਲੇ ਨੇ, ਸਿਰਜਣਾ ਦੀ ਲੋਰ ਹੈ, ਏਹ ਦੁਨੀਆਂ ਹੋਰ ਐਪਰ ਓਹ ਜਗਤ ਕੁਝ ਹੋਰ ਹੈ। ਏਸ ਦੁਨੀਆਂ ਕੁਹਜ ਹੈੱ ਤਾਂ ਸੁਹਜ ਹੈ ਜੀ ਉਸ ਗਰਾਂ, ਏਸ ਦੁਨੀਆਂ ਤਲਖੀਆਂ ਤੇ ਸਹਿਜ ਓਥੇ ਤੋਰ ਹੈ। ਸ਼ੋਰ ਏਥੇ ਹਰ ਘੜੀ ਤਾਂ ਸੁਰ ਸਜੀਲੇ ਉਸ ਤਰਫ, ਓਸ ਨਗਰੀਂ ਵੰਝਲੀ, ਏਥੇ ਤਾਂ ਬਾਂਸੀ-ਪੋਰ ਹੈ। ਧੜਕਣਾ ਵਿੱਚ ਸੰਸਿਆਂ ਦੀ ਭੀੜ ਡਾਹਢੀ ਇਸ ਤਰਫ ਉਸ ਨਗਰ ਵਿੱਚ ਪੈਲ ਪਾਂਉਂਦੇ, ਬਾਰ੍ਹੋਂ-ਮਾਸੀਂ ਮੋਰ ਹੈ। ਇਸ ਨਗਰ ਤਾਂ ਜਾਤਾਂ ਪਾਤਾਂ ਊਚਨੀਚਾਂ ਢੇਰ ਨੇ, ਓਸ ਨਗਰੀਂ ਸਭ ਦਿਲਾਂ ਵਿੱਚ ਬਸ ਮੁਹੱਬਤ ਹ਼ੋਰ ਹੈ। deepzirvi@yahoo.co.in) -admin... saandalbaar@gmail.com
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- ਦੀਪ ਜੀਰਵੀ DEEP ZIRVI
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